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Friday, January 22, 2021

खेत में पानी घुसने से हुआ बड़ा गड्ढा, किसान काट रहा है दफ्तरों के चक्कर

 


शहडोल। कोल इंडिया को कोयले के उत्पादन में किसानों की जमीनों पर कीर्तिमान हासिल कर रहे हैं और हमेशा यह बात का ढिंढोरा पीटते रहते हैं की किसानों के साथ न्यायसंगत तरीके से उन्हें हर संभव मदद  करते रहेंगे लेकिन जब मदद का वक्त आता है तो वही अधिकारी चाहे सेवानिवृत्त कर्मचारी हो या किसान उन्हें कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर कर देते हैं इसी तरह का एक मामला एसईसीएल सोहागपुर एरिया के वार्ड नंबर 23 धनपुरी निवासी  अब्दुल समीर किसान के साथ बैगा खुली खदान के बगल में स्थित जमीन में पानी के बहाव को विपरीत दिशा की ओर कॉलरी प्रबंध तंत्र के द्वारा कर देने की वजह से खेती करने के लाले पड़ गए हैं।


बुढ़ार ग्रुप प्रबंधक के आश्वासन का शिकार किसान


सोहागपुर एरिया के बुढार ग्रुप प्रबंधन के द्वारा सेवानिवृत्त कर्मचारी के जमीन पर पूरे परिवार को पालने के लिए बैगा खुली खदान से पहले खेती कर इंतजाम हो जाता था लेकिन खदान के उत्पादन के समय चौड़े नाले से पानी के बहाव पर मिट्टी डालकर उस नाले को सकरा कर देने से किसान के खेत में गहरे गहरे गड्ढे हो जाने की वजह से पानी का  ठहराव नहीं हो पा रहा है। जबकि इसके लिए सेवानिवृत्त कर्मचारी के द्वारा उप क्षेत्र प्रबंधक एवं विभागीय अधिकारियों लिखित आवेदन के बाद भी उन्हें आश्वासन के संबंध में बांधकर रखे हुए है।

मुख्य महाप्रबंधक बदलते रहे किसान की समस्या यथावत



सोहागपुर एरिया मुख्य महाप्रबंधक के कार्यालय में सेवानिवृत्त कर्मचारी किसान के द्वारा स्वयं मिलकर कई बार आवेदन पत्र के साथ आग्रह भी किया गया लेकिन अधिकारियों के द्वारा निरीक्षण करा कर जल्द ही समस्या का निदान किया जाएगा। सर्वे विभाग द्वारा  निरीक्षण करने के उपरांत मुख्य महाप्रबंधक के कार्यालय से जमीन को यथास्थिति कराने के लिए आश्वासन तो दे दिया गया है लेकिन मुख्य महाप्रबंधक के द्वारा किसान अब्दुल समीर की खेती वाले जमीन जस की तस स्थिति में है। किसान के द्वारा यह भी जानकारी दी गई की लिखित रूप से अधिकारियों को अवगत कराया गया है। यहां तक की इस ओर मुख्य महाप्रबंधक के द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिस वजह से मेरी आर्थिक स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है, जबकि मेरे पूरे परिवार में 16 सदस्यों से भरा हुआ है और इनको खाने पीने के लाले पढ़ रहे हैं। किसान ने आगे बताया कि चार बच्चे प्रतिदिन मजदूरी करके अपने परिवार का किसी तरह से पालन पोषण कर रहे हैं जबकि बच्चों को अच्छी शिक्षा ना दे पाने का उन्हें  दिल में मलाल बना हुआ है।

सोहागपुर एरिया के अधिकारियों की वजह से अनाज उगाना मुश्किल


एसईसीएल एरिया के मुखिया की अनदेखी के शिकार, किसान के द्वारा अपनी ही जमीन पर खेती न कर पाने का गम खाए जा रहा है और उनके स्वास्थ्य में भी गिरावट हो रही है, इस चिंता का वजह से  खेत में बड़ा गड्ढा हो जाना और अधिकारियों के द्वारा केवल आश्वासन देना।


खोखले आश्वासन से किसान की मानसिक स्थिति में तनाव


सेवानिवृत्त कॉलरी कर्मचारी की स्थिति वर्ष भर के अनाज उगाने से बेफिक्र होकर जिंदगी गुजर रही थी। मुख्य महाप्रबंधक की नजरें इनायत उस बेचारे किसान के ऊपर नहीं जाने की वजह से उसका परिवार भी विकट स्थिति परिस्थितियों के साथ जीवन की राह पर चलना अब मुश्किल पढ़ रहा है और किसान की मानसिक स्थिति भी अधिकारियों के उनके समस्याओं पर ध्यान न देने की वजह से बिगड़ती जा रही है जिसकी वजह से हर व्यक्ति से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए चर्चा करते हुए नजर आते हैं अगर उनके खेत में मिट्टी से भराव करके नहीं बनाया क्या तो इस दिमागी टेंशन की वजह से कभी भी कोई अप्रित घटना उनके परिवार के लिए एक मुसीबत पैदा कर सकती है।


मुख्य महाप्रबंधक का भी नहीं है किसान की ओर ध्यान


सोहागपुर एरिया के मुख्य महाप्रबंधक का गरीब की  खेत पर मिट्टी डालकर उसे खेती हेतु तैयार कर देने से सामाजिक दृष्टिकोण से पुण्य का कार्य होगा लेकिन मुख्य महाप्रबंधक का  ध्यान इस तरफ ना जाने का कारण क्या है यह भी समझ से परे है।


इस युग में इंसानियत भी  नहीं रही


अब्दुल समीर  अपने जीवन काल में खेत को फिर हरा भरा देखना चाहते हैं लेकिन कालरी प्रबंध तंत्र के अधिकारियों के द्वारा उनकी इस खुशी को उनकी उम्र को ध्यान में रखते हुए पूरा करने के इरादे से नजर नहीं आ रहे।  हिंदी भाषा में यह कहे कि अब अब्दुल समीर के लिए इंसानियत इस युग में जिंदा नहीं रह गई तो बेचारे वृद्ध की आवाज अब कैसे सुनाई दे।

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