शहडोल। मध्यप्रदेश आबकारी नियमों के अनुसार शराब की दुकानें केवल कमर्शियल क्षेत्रों में ही खोली जा सकती हैं तथा स्कूल, धार्मिक स्थल और संवेदनशील स्थानों से निर्धारित दूरी का पालन अनिवार्य होता है। सरकारी गाइडलाइन के अनुसार स्थान चयन में पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है।
चौक-चौराहों पर बड़ी दुकानों को लेकर चर्चा
स्थानीय स्तर पर कुछ स्थानों पर यह चर्चा सामने आई है कि चौक-चौराहों जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में नई और भव्य शराब दुकानें खोली गई हैं। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि या विभागीय रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है, लेकिन स्थानीय नागरिकों के बीच यह मुद्दा चर्चा में बना हुआ है।
जिला जेल के पास दुकान खुलने का मामला
कुछ रिपोर्टों और स्थानीय चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि जिला जेल के आसपास भी बड़ी और आधुनिक शराब दुकानें संचालित की गई हैं। इस प्रकार के स्थानों को संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है, इसलिए वहां दुकान होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं फिलहाल यह विषय जांच और पुष्टि के स्तर पर होना चाहिए है।
ठेकेदारों की भूमिका और व्यवस्था
शराब दुकानों का संचालन ठेकेदारों के माध्यम से लाइसेंस सिस्टम के तहत किया जाता है।
प्रक्रिया में शामिल होता हैरू
टेंडर प्रक्रिया,
लाइसेंस स्वीकृति,
स्थान का सरकारी अनुमोदन
बैंक गारंटी और शुल्क, जबकि विभाग के नजरिए से देखा जाए तो सभी दुकानें नियमों के तहत ही आवंटित की जाती हैं।
जनता और स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर लोगों की राय अलग-अलग हैरू
कुछ लोग इसे नियमों का उल्लंघन मानते हैं,
कुछ लोग इसे व्यावसायिक नीति का हिस्सा बताते हैं,
कई जगह पारदर्शिता और निगरानी की मांग भी उठ रही है।
मध्यप्रदेश में शराब दुकानों के स्थान चयन को लेकर नियम स्पष्ट हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके पालन को लेकर समय-समय पर सवाल और चर्चाएँ सामने आती रहती हैं।
