बीरेंद्र सिंह अनूपपुर। नाभिकीय जगत में ईंधन पुनर्ससाधन एक ऐसा जटिल विषय है जिसका हिंदी संस्करण अभी तक उपलब्ध नहीं था। भाषा के प्रचार में जुड़ी हिंदी विज्ञान साहित्य परिषद परमाणु अनुसंधान केंद्र मुंबई ने यह एक उत्कृष्ट एवं सराहनीय कदम उठाया है, जिसके अंतर्गत इस विषय को प्राथमिकता देते हुए मोनोग्राफ लिखने के लिए लेखक को प्रेरित किया इसके लिए पूरा परिषद धन्यवाद के पात्र है। इस पुस्तक द्वारा ईंधन पुनर्संसाधान एवं प्लूटोनियम जो कि एक मानव निर्मित तत्व है के सभी आवश्यक पहलुओं को समायोजित कर 164 पृष्ठों में प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है। जिसमें इस जटिल विषय की जानकारी सरल भाषा में स्कूली स्तर तक के छात्रों को भी मिल सकेगी।
संपादक मंडल एवं डॉक्टर कुलवंत सिंह के इस श्रम साध्य सहयोग के लिए लेखक कृतज्ञता व्यक्त करते हैं एवं विश्वास है कि इस नव्य विषय पर आधारित मोनोग्राफ पाठकों की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। पुस्तक के लेखक डॉ नारेंद्र सिंह राठौर एवं देवदत्त बाजपेयी है जो भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र तारापुर के वैज्ञानिक है। डॉ नारेंद्र सिंह जी ने अनूपपुर जिले को गौरवान्वित किया है क्योंकि उनका जन्म तथा शिक्षा दीक्षा चचाई ,बुढार तथा शहडोल जिला में संपन्न हुई थी। डॉक्टर नारेंद्र सिंह जी जो पत्रकार तथा भारत विकास परिषद अध्यक्ष श्री बीरेंद्र सिंह जी के अग्रज भ्राता है , यंग साइंटिस्ट अवार्ड से भी सम्मानित हो चुके है तथा आप ने दो वर्ष के लिए अनुसंधान कार्य हेतु स्पेन में भी सेवा दी है।
