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Thursday, September 17, 2020

ग्राम पंचायत सकरिया के सरपंच बने गांव के विकास के बाधक

अपने परिचितों की बनाई सड़क, ग्रामीणों की समस्या से सारोकार नहीं

शिरीष नंदन श्रीवास्तव, शहडोल।  ग्राम पंचायत सकरिया के ग्रामीण जन सरपंच और सचिव के खिलाफ लामबंद हुए और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत गोहपारू के समक्ष सरपंच रामसुंदर सिंह और सचिव के विरुद्ध  शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के सम्बन्ध में ग्रामीण जानो ने कहा कि जनपद पंचायत गोहपारू के अंतर्गत आने वाला गांव सकरिया इन दिनों भ्रष्टाचार की नई  कहानी  लिख रहा है।  यहाँ पदस्थ सरपंच और सचिव की मिलीभगत के कारण गांव का विकास रुक गया है जिस कारण ग्रामीण जन परेशान हो रहे है।

इस गांव की सबसे बड़ी समस्या सड़क की है पूरे गांव में सड़क का नामोनिशान नहीं है जिस कारण बरसात के समय पूरे रास्ते में कीचड और मलबा भरा रहता है। सरपंच रामसुंदर सिंह पिछले दस सालो से सरपंच है जो केवल अपने परिचितों और अपने उपयोग में आने वाले मार्ग में सीसी रोड तो बनवा चुके है लेकिन जिन रास्ते से ग्रामीण जन होकर गुजरते है वो रास्ता आज भी निर्माण को तरस रहा है।

इसी तदाशय से समस्त ग्रामीण जन एक जुट होकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। अपनी शिकायत में ग्रामीण जानो ने कहा है कि हम समस्त ग्राम वासी सकरिया गांव के निवासी है और अपने गांव के सरपंच और सचिव से परेशान हो चुके है गांव में कई जगहों में सीसी रोड और ग्रेवाल सड़क निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है लेकिन आज तक सबसे आवश्यक सड़क का निर्माण नहीं करवाया गया है बल्कि गांव में जिस और सीसी सड़क का निर्माण कराया गया है उस और ग्रामीण जानो का आनाजाना बहुत ही कम है। सड़क निर्माण के लिए आये हुए मजदूरों को भी पूरा भुगतान नहीं दिया गया है बल्कि फर्जी  हस्ताक्षर कर भुगतान कि राशि में हेरफेर किया गया है। सरपंच रामसुंदर सिंह स्वयं गांव में अपनी फाइल लिए घूमते रहते है जिनमे अपनी पहचान के दुकानदार के खाली बिल भी रखे हुए है और मनचाही रकम भर कर पंचायत से पास करवालेते है।

पंचायत में गांव के उपयोग के लिए दो  स्थानों  में सिचाई के साधन भी निर्माण होना था जिसे सरपंच ने अपने निजी खेत में लगवा लिया है। ग्रामीण जानो ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरपंच के द्वारा कराये गए निर्माण कार्यों कि तत्काल जाँच करवावी जाये साथ ही दोनों के विरुद्ध कार्रवाई कि जाये जिससे गांव का विकास पुनः प्रारम्भ हो सके। शिकायत करने वाले ग्रामीणों में रामप्रसाद सिंह. धीर सिंह, उदयराज सिंह. मणिराज सिंह. भैया प्रसाद दरबारी सिंह, महावीर सिंह, दादूराम सिंह, मनदीप सिंह, बाबूलाल  सिंह पाव, लखन सिंह, मुन्ना सिंह, विधान सिंह, संतलाल सिंह, प्रदीप सिंह, सुधीर सिंह, हीरामन सिंह, बिदुर सिंह, सरनाम सिंह, देवशरण सिंह, नंदा सिंह, पप्पू सिंह, सम्पत सिंह, लल्लू सिंह, इंद्रपाल सिंह, दिनेश सिंह, सूंदर सिंह, फूलमती बाई, राम सिंह, बुद्धसेन बब्बू सिंह, छोटेलाल सिंह, सलभान सिंह, लोकमन सिंह, बबलू सिंह, रोहित सिंह, शिवप्रसाद सिंह, लल्लू सिंह शामिल रहे।

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