शहडोल खबर । केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नागरिकता संशोधन कानून (सी ए ए) के खिलाफ मंगलवार को आम जनमानस सड़क पर उमड़ पड़े। मुस्लिम वर्ग के साथ ही समाज के अन्य वर्ग के लोगों ने भी संविधान बचाओ-तिरंगा रैली में अपनी सहभागिता निभाई। हाथों में तिरंगा झंडा लिए और सीएए कानून को वापस लो के नारे लिखी हुई तख्ती हाथों में लिए हजारों की तादाद में लोग रेलवे मैदान में एकत्र हुए। संविधान बचाओ-तिरंगा रैली रेलवे मैदान से प्रारंभ होकर पुराना गांधी चैक, न्यू गांधी चैक और अंबेडकर तिराहा होते हुए जयस्तंभ पहुंची जहां सभा हुई।
बारिश में भी कम न हुआ जोश
रेलवे मैदान से जैसे ही रैली प्रारंभ हुई पानी की फुहार पढ़ने लगी और कुछ ही देर में बारिश शुरू हो गई। लेकिन रैली में चल रहे लोगों पर उनके जोश के सामने बारिश का भी असर नहीं हुआ और लोग पानी में भीगते हुए अपने कदमों को बढ़ाते चले गए। हजारों की तादाद में चल रहे लोगों के बीच से सिर्फ यही नारा गूंज रहा था कि आवाज दो हम सब एक हैं, इंकलाब जिंदाबाद, सीएए को वापस लो और हिंदुस्तान जिंदाबाद।
संविधान बचाओ-तिरंगा रैली में
सबसे आगे महिलाएं चल रही थी, जिनके हाथों में सीएए वापस लो का बैनर था। रैली में चल रहे युवा विशालकाय तिरंगा झंडा को भी अपने हाथों में लिए हुए थे। तिरंगा रैली की एक खासियत यह भी थी कि इस रैली में मुस्लिम समाज के साथ ही मूलनिवासी संघ, मसीही समाज और आदिवासी वर्ग के साथ ही कई अन्य समुदाय के लोग भी सीएएके खिलाफ हाथों में तख्ती लिए अपनी सहभागिता निभा रहे थे। रैली को देखते हुए पुलिस की भी माकूल व्यवस्था की गई थी और रैली के आगे पुलिस बल चल रहा था। शहर के प्रमुख चैराहों में भी पुलिस मुस्तैद थी।
मंसूबों को समझना जरूरी
संविधान बचाओ-तिरंगा रैली के जय स्तंभ पहुंचने पर वहां सभा का भी आयोजन किया गया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने सीएए, एनपीआर और एनआरसी को लेकर अपनी बातों को बेबाकी के साथ रखा। वक्ताओं ने कहा कि सीएए, एनपीआर और एनआरसी के पीछे के मंसूबों को भी समझना बेहद जरूरी है। वक्ताओं ने कहा कि इस कानून का विरोध इसलिए जरूरी है, क्योंकि यह कानून हमारे संविधान की बुनियादी आत्मा, धर्मनिरपेक्ष स्वरूप और ढांचे पर सीधे चोट करता है। वक्ताओं ने कहा कि हमारा संविधान किसी भी नागरिक के साथ जाति, धर्म, भाषा, लिंग, नस्ल और जन्म स्थान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करता है। लेकिन इस कानून के द्वारा धर्मनिरपेक्ष ढांचे पर सीधा हमला किया जा रहा है। सभी भक्तों ने यह भी कहा कि यह हमारी संस्कृति है कि हम मिलजुल कर रहते आए हैं। आज भी मिल जुलकर हैं और आगे भी मिलजुल कर रहेंगे, हमें कोई बांट नहीं सकेगा।
सभा को लोक जतन के संपादक, किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष और वामपंथी चिंतक जसविंदर सिंह, फादर जोश एंथोनी, मूलनिवासी संघ के बीके साहू व समय लाल प्रजापति, समाजवादी नेता धर्मेंद्र श्रीवास्तव टिक्कू, महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष श्रीमती शिम्पी अग्रवाल, समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष राशिद खान, डॉ क्रिस्टी अब्राहम, हेमंत ऐसक एवं हेमंत मोहंती के साथ ही कई अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। सभा का संचालन कांग्रेस नेता महमूद अहमद ने किया जबकि अंत में पार्षद सुफियान खान ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस दौरान महामहिम राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को एक ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें केंद्र सरकार से मांग की गई है कि सीएए कानून को वापस लिया जाए। वही सम्मिलित लोग में मध्य प्रदेश मुस्लिम विकास परिषद के जिला अध्यक्ष मोहम्मद इस्माइल, जिला उपाध्यक्ष आमिर, जिला सचिव मुजफ्फर खान, जिला प्रवक्ता सैफ अहमद काजी, ब्लॉक अध्यक्ष बुढार के मुस्ताक अली, धनपुरी नगर के सचिव मोहम्मद मोईन, धनपुरी नगर के उपाध्यक्ष रियाज खान, धनपुरी कार्यकारिणी अध्यक्ष मोहम्मद अमीम, बुढार नगर अध्यक्ष हुसैन नियाजी एवं मौलाना जरयाब आदि लोगों की उपस्थिति एवं समस्त मुस्लिम विकास परिषद परिषद के कार्यकर्ता के द्वारा एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम से ज्ञापन सौंपा गया है।
