मोहम्मद हारून, धनपुरी। विवेक नगर भूमिगत खदान में बन रहे ईको पार्क, विशाल जलाशय, मियावाकी जंगल और 5 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना को बताया हरित भविष्य की नींव, सोहागपुर हाउस में 3 घंटे तक चली समीक्षा, सतर्कता और पारदर्शिता पर दिया विशेष जोर देश के कोयला क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव एसईसीएल सोहागपुर से देखने को मिल रहा है। जहाँ कभी कोयला निकालने के लिए दिन-रात मशीनें चलती थीं, वहीं अब उन्हीं बंद पड़ी खदानों को हरियाली, ऊर्जा और जनसुविधाओं का केंद्र बनाया जा रहा है। इसी परिवर्तन की बानगी देखने को मिली एसईसीएल के सोहागपुर क्षेत्र में, जहाँ भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी (सी व्ही ओ) मनोज कुमार गांगेय ने सोमवार को व्यापक दौरा किया।
श्री गांगेय का यह दौरा केवल एक औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की दो महत्वपूर्ण नीतियों-जस्ट ट्रांजिशन(न्यायसंगत परिवर्तन) और माइन टू ग्रीन माइन (खदान से हरित खदान) को जमीन पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
विवेक नगर खदान: जहाँ से निकलता था काला हीरा, अब बनेगा हरियाली का केंद्र
दौरे की शुरुआत सुबह करीब 10 बजे विवेक नगर भूमिगत खदान से हुई। यह खदान पिछले कई दशकों तक इस पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा रही है। यहाँ के कोयले से देश के कई पावर प्लांट चले हैं। उत्पादन समाप्त होने के बाद यह क्षेत्र वीरान पड़ा था।
कोयला मंत्रालय ने अब एक नई सोच के तहत देश की सभी बंद खदानों को बंद परिसर के रूप में छोड़ने के बजाय उन्हें जनता के लिए उपयोगी बनाने का निर्णय लिया है। इसी के तहत सोहागपुर में विवेक नगर खदान को एक विश्वस्तरीय ईको पार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है।
श्री गांगेय ने यहाँ चल रहे कार्यों का एक-एक कर निरीक्षण किया:
1. विशाल जलाशय (तालाब): वर्षा जल संचयन और भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए बनाया जा रहा बड़ा तालाब, जो भविष्य में पर्यटन का केंद्र भी बनेगा।
2. मियावाकी वन: जापानी तकनीक से कम जगह में घना जंगल विकसित किया जा रहा है, जिसमें 50 से अधिक प्रजातियों के पौधे लगाए जा रहे हैं।
3. जनसुविधाएं:बच्चों के लिए आधुनिक पार्क, युवाओं के लिए ओपन जिम, बुजुर्गों के लिए सैर करने के लिए पाथ-वे और बैठने की व्यवस्था।
उन्होंने अधिकारियों से प्रत्येक परियोजना की लागत, समय-सीमा और स्थानीय लोगों को होने वाले लाभ की जानकारी ली।
5 मेगावाट सोलर प्लांट: काले कोयले की धरती से निकलेगी हरित बिजली
इस पूरे दौरे का सबसे आकर्षक केंद्र 5 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र रहा। अधिकारियों ने बताया कि ईको पार्क के एक हिस्से में यह विशाल सोलर प्लांट लगाया जा रहा है।
इस प्लांट की विशेषता यह है कि यह कोयला खदान की बंजर पड़ी जमीन का उपयोग करके स्वच्छ ऊर्जा बनाएगा। इससे सालाना लगभग 7000 टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी। साथ ही एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र की बिजली की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी से पूरा होगा, जिससे कंपनी का बिजली बिल भी कम होगा।
श्री गांगेय ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, "यह वही धरती है जहाँ से हमने दशकों तक कोयला निकालकर देश को रोशन किया। अब यही धरती सूरज की रोशनी से बिजली बनाकर देश को रोशन करेगी। यही असली जस्ट ट्रांजिशन है। यह मॉडल पूरे कोल इंडिया के लिए अनुकरणीय है।"
पौधारोपण: बरगद लगाकर दिया 100 सालों का संदेश
निरीक्षण के बाद श्री गांगेय ने ईको पार्क परिसर में बरगद का एक पौधा लगाया। उन्होंने कहा कि बरगद का पेड़ सैकड़ों साल तक रहता है और हजारों लोगों को छाया देता है। उन्होंने सभी अधिकारियों से अपील की कि पौधा लगाना ही काफी नहीं है, उसकी देखभाल मां की तरह करनी होगी।
उन्होंने कहा, विकास का मतलब केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है। सच्चा विकास वही है जिसमें पर्यावरण बचे, स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और आने वाली पीढ़ी के लिए भी कुछ बचे।
सोहागपुर हाउस में मैराथन बैठक, हर फाइल पर हुई चर्चा
दोपहर बाद सोहागपुर हाउस के सभागार में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई जो लगातार तीन घंटे तक चली। बैठक में सोहागपुर क्षेत्र के उत्पादन लक्ष्य, खदानों में सुरक्षा के इंतजाम, पर्यावरण के नियमों का पालन, भूमि अधिग्रहण से जुड़े किसानों के मुआवजे के मामले और सीएसआर के तहत चल रहे स्कूल, अस्पताल और सड़क निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई।
सतर्कता पर सख्त संदेश: भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
चूंकि श्री गांगेय कोयला मंत्रालय के मुख्य सतर्कता अधिकारी भी हैं, इसलिए बैठक में सतर्कता संबंधी विषयों पर विशेष जोर दिया गया। केंद्रीय सतर्कता आयोग के निर्देश पर कोल इंडिया में चल रहे 3 महीने के विशेष सतर्कता जागरूकता अभियान की प्रगति देखी गई।
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सभी टेंडर, ठेके और खरीद प्रक्रियाओं में 100% पारदर्शिता होनी चाहिए। ई-टेंडरिंग को बढ़ावा दिया जाए। किसी भी तरह की शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और उसका समय पर निपटारा किया जाए। उन्होंने कहा कि एक पारदर्शी सिस्टम ही कंपनी को आगे ले जाता है।
अंत में: बंद खदान से हरित भविष्य की ओर
देर शाम तक चले इस दौरे के बाद यह साफ हो गया कि सोहागपुर क्षेत्र अब केवल कोयला उत्पादन के लिए नहीं, बल्कि बंद खदानों के बेहतर उपयोग के लिए भी जाना जाएगा। विवेक नगर ईको पार्क आने वाले समय में शहडोल संभाग के लिए एक नया पर्यटन स्थल, हरित ऊर्जा का केंद्र और पर्यावरण संरक्षण का जीता-जागता उदाहरण बन सकता है।
इस अवसर पर क्षेत्रीय महाप्रबंधक मनीष कुमार श्रीवास्तव, महाप्रबंधक (एमसीआर) पीयूष किशोर सभी उपक्षेत्रीय प्रबंधक, सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, सुरक्षा अधिकारी और श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


